पति द्वारा माता-पिता को पैसा भेजना क्रूरता नहीं | SC ने 498A मामला खारिज किया
यह वीडियो सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले पर आधारित है, जिसमें धारा 498A के तहत दर्ज मामला खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि पति द्वारा अपने माता-पिता को पैसे भेजना या घर के खर्चों का एक्सेल शीट में हिसाब रखना किसी भी स्थिति में क्रूरता नहीं माना जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि में पत्नी द्वारा पति पर लगाए गए आरोप थे, जो उनके वैवाहिक विवाद से जुड़े थे। दोनों पति-पत्नी सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, जिनकी शादी वर्ष 2016 में हुई थी और वे अमेरिका में रह रहे थे। बेटे के जन्म के बाद मतभेद बढ़े, जिसके बाद पत्नी भारत लौट आई और वर्ष 2022 में पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति महादेवन की पीठ ने यह निर्णय देते हुए कहा कि परिवार को आर्थिक सहयोग देना या खर्चों का व्यवस्थित लेखा-जोखा रखना आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को पलटते हुए पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी के आरोपों में ठोस विवरण और विश्वसनीय साक्ष्यों का अभाव था, विशेष रूप से दहेज की मांग से संबंधित आरोपों में। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मानसिक या शारीरिक क्रूरता सिद्ध करने के लिए ठोस प्रमाण आवश्यक हैं; केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं।
इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि भारतीय समाज में पति द्वारा वित्तीय प्रबंधन करना एक सामान्य व्यवहार है, जिसे क्रूरता या व्यक्तिगत बदले का साधन नहीं माना जा सकता। इस फैसले में धारा 498A के दुरुपयोग को भी रेखांकित किया गया और कहा गया कि आरोप तभी स्वीकार्य होंगे जब वे विशिष्ट और प्रमाणिक साक्ष्यों पर आधारित हों।
पति के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज करते हुए यह निर्णय एक महत्वपूर्ण नज़ीर (precedent) स्थापित करता है, जो यह दोहराता है कि अस्पष्ट और बिना सबूत के लगाए गए आरोपों को न्यायालय स्वीकार नहीं करेगा।
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